Thursday, June 4, 2026

 साधी भाई मैं हूँ पुरुष पुराना।

श्री मांगारामजी ) [ अपरोक्ष पद ]

 साधी भाई मैं हूँ पुरुष पुराना।
 आना जाना मुझ में नाही,
 सदा रहूँ गलताना ।


 ढेर पिण्ड ब्रह्माण्ड से न्यारा खेलूं,
नहीं ज्ञान विज्ञाना।
 कर्ता कर्म से मैं हूँ न्यारा,
पाप पुण्य नहीं माना ॥


 भाव अभाव मुझ में नहीं,
नहीं धरता में ध्याना।
 दृष्टा दृष्य का मैं हूँ साक्षी,
सदा रहूँ मस्ताना ॥


अजर अमर अखण्डित चेतन,
 व्यापक सबमें समाना।
 मरण का लेश न मुझ में
 नहीं लाभ नहीं होना ॥


 शब्द सैन धुन नहीं लागे,
पहुँचे नकाल कबाना।
 मांगूराम आत्म सत्त चेतन,
शुद्ध स्वरूप रहाना ॥