सैंया आनन्द पाया ऐ।
सन्त दानाराम जी की वाणी
(मध्यमा)
सैंया आनन्द पाया ऐ।
सिर पर हाथ धरियो गुरु दाता,
शब्द सुनाना ऐ । टेिर ॥
आज सखी री आँख फरुकी,
काग उड़ाया ऐ ।
गुरु मिलन की अजब उम्मेदी,
दर्शन पाया ऐ ॥ १ ॥
कली-कली सब खिल गई सारी,
बाग सिंचाया ऐ।
डाल-डाल पर कोयल बोले,
भंवर गुंजाया ऐ ।।२ ॥
अड़सठ तीरथ गुरु चरणा में,
निसदिन नहाया ऐ।
निर्मल काया वेगी सारी,
उज्जवल थाया ऐ ।।३ ॥
सतगुरु देव जगत में आया,
हाथ दिखाया ऐ ।
संजीवन बूंटी घोट पिलाई,
दर्द मिटाया ऐ ॥ ४ ॥
धन-धन वर्ष मास दिन वारा,
मम मन भाया ऐ ।
मुहर्त घड़ी लगन पल आछो,
शीश झुकाया ऐ ॥ ५ ॥
केवलराम मिल्या गुरु पूरा,
भाग सवाया ऐ ।
'दानाराम" गुरु की शरण में,
गुरु गुण गाया ऐ ॥६॥