साधो भाई झूठा ने झूठ सुहावे
(श्री कल्याण भारती जी ) [ बेकरी ]
साधो भाई झूठा ने झूठ सुहावे ।
चोरों का दाँव अन्धेरा में लागे,
नहीं चान्दणों चावे ॥ टेर ॥
झूठा बना झूठ की टोली,
मन मुखी ज्ञान चलावे ।
गावे भजन अर्थ नहीं जाणे,
सपना ज्यूँ बरड़ावे ॥
गांजा सुलफा अमल तम्बाकू
भंग के रंग लगावे ।
नीची पलक नशा में राखे,
उसको ध्यानी बतावे ॥
मांस खाय मदिरा पीवे,
पर त्रिय पाप कमावे।
कुकर्म करे बने महाज्ञानी,
सन्ता में नहीं शरमावे।।
भक्ति करे नहीं साधे योग को
गुरु सेवा नहीं भावे
साधन बिना ब्रह्म बन बैठो
सीधो नर्क सिधावे ।।
झूठो गुरु पंथ है ज्यों को
झूठो उपदेश सुनावे।
झूठा बन्ध्या झूठ के पेड़े
कर पाखण्ड पुजावे ॥
जन्त्र मन्त्र टोटका साधे,
सिद्धि के ओलै ठग खावे।
जिसको कहे महात्मा पूरा,
रातों पाँव दबावे ॥
जो कोई अनुभवी हो सतवादी,
सत्य उपदेश दृढ़ावे ।
उसको देख विरोध अति ठाने
परचा की डाट बतावे ॥
वेदानुकुल बात नहीं माने
झूठो ज्ञान सरावे ।
बिना प्रमाण गपोड़ा हाँके,
सन्ता में रौल मचावे |
उज्जवल वर्ण भेष बगुला ज्यों
अन्तर ज्ञान चलावे ।
कृतघ्नी बन रहे गुरु द्रोही,
आत्म तत्व किम ॥
अपणी कहे नहीं सुणे ओर की
ज्यासूं कुण मूंड पचावे ।
कल्याण भारती सच-सच भाखे,
झूठा से राम बचावे ॥