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Saturday, July 4, 2026


 संगत करोनी निर्मळ साद री
 म्हारी हेली हे जासूँ,
 आवागमन मिट जाय

 चन्दन उग्यो हरिए बाग़ में
म्हारी हेली ख़ुशी भई वनराई
 चन्दन सुगंध औरों ने करे म्हारी हेली
 रही सुगंधी छायं

 पर्वत उग्यो हरियो बाँसडो म्हारी
हेली धूज रही वनराई
 आप जळे संग औरों ने जाळे हेली
 कपट गाँठ घाट म्हायं धुं लागी
दावा डुन्गरा म्हारी हेली
 मिल गयी जाळो जाळ

 और पंखेरू सब उड़ गया म्हारी
 हेली हंस रह्या बैठा डाळ
 चन्दन हंस मुख बोलिया
म्हारी हेली थे क्योँ जळो
हंस राय मैं तो jalo बिन पांखियाँ
 म्हारी हेली हे म्हारी
जड़ों है पताळो रे

 म्हाय हळखाया पात तोडिया
 म्हारी हेली रमिया डाळो डाळ थे
 तो जळो भेळा मैं ही जळो
म्हारी हेली जीवणों किती एक वार
 चन्दन हंस प्रीत देखियो म्हारी हेली
 झिरमिर वर्षया मेह

 कहेत कबीर धर्मिदास ने म्हारी हेली
 नित नित नवला नेह
 संगत करोनी निर्मळ साद री
म्हारी हेली हे जासूँ,
आवागमन मिट जाय