चन्दन उग्यो हरिए बाग़ में म्हारी हेली ख़ुशी भई वनराई चन्दन सुगंध औरों ने करे म्हारी हेली रही सुगंधी छायं
पर्वत उग्यो हरियो बाँसडो म्हारी हेली धूज रही वनराई आप जळे संग औरों ने जाळे हेली कपट गाँठ घाट म्हायं धुं लागी दावा डुन्गरा म्हारी हेली मिल गयी जाळो जाळ
और पंखेरू सब उड़ गया म्हारी हेली हंस रह्या बैठा डाळ चन्दन हंस मुख बोलिया म्हारी हेली थे क्योँ जळो हंस राय मैं तो jalo बिन पांखियाँ म्हारी हेली हे म्हारी जड़ों है पताळो रे
म्हाय हळखाया पात तोडिया म्हारी हेली रमिया डाळो डाळ थे तो जळो भेळा मैं ही जळो म्हारी हेली जीवणों किती एक वार चन्दन हंस प्रीत देखियो म्हारी हेली झिरमिर वर्षया मेह