Wednesday, June 24, 2026

 दोहा:
राम नाम की लूट है,
 लूट सके तो लूट ।
 अंत समय पछतायेगा,
 जब प्राण जायेंगे छूट ॥
 
तेरे मन में राम,
तन में राम,
 रोम रोम में राम रे,
 राम सुमीर ले,
ध्यान लगाले, छोड़
जगत के काम रे ।
 बोलो राम, बोलो राम,
 बोलो राम राम राम ॥

 माया में तू उलझा उलझा
 धर धर धुल उडाये,
 अब क्यों करता मन भारी
 जब माया साथ छुडाए ।
 दिन तो बीता दोड़ दूप में,
 बीत ना जाए शाम रे,
 बोलो राम, बोलो राम,
 बोलो राम राम राम ॥

 तन के बीतर पांच लुटेरे
 डाल रहें हैं डेरा,


 काम क्रोध मद लोभ मोह ने
 तुझ को कैसा घेरा ।
 भूल गया तू राम रटन,
 भूला पूजा का काम रे,
 बोलो राम, बोलो राम,
 बोलो राम राम राम ॥


 बचपन बीता खेल खेल में
 भरी जवानी सोया,
 देख बुढापा अब तो सोचे,
 क्या पाया क्या खोया ।
 देर नहीं है अब भी बन्दे,
 लेले उस का नाम रे,
 बोलो राम, बोलो राम,
 बोलो राम राम राम ॥