हेजी इणने अमर बिन्द परणावो
ने सुरता ने
सत वचनों सुं कर लो सगाई
सम संतोष सदा मन मांही
हेजी अब, निश्चय ना रेल झळावो
रे सुरता ने
पांच विषय रो टीको देदो
पांच कोष के गाँव भी देदो
हेजी अपणे चित मांही चंवरी मंडावो
रे सुरता ने
बेफिक्री रा फूल बनावो
सुंगंध सेवरा खूब सजावो
हेजी योरे, दोनों रे गळ पहिरावो रे
मन हस्ती जो रे आगम अम्बाडी
ब्रह्म बिन्द ज्योरीं निकसी सवारी
हेजी उणने, निरती निरख सरावो रे
सुरता ने
गुरु ब्राह्मण चंवरी में आया
माया ब्रह्म रा हाथ जुडाया
हेजी उठे, कीर्ति मंगळ गावो रे
सुरता ने
56546544564545
तत्त्वं सी का शब्द सुणाया
तत्त्वं सी का मंत्र सुणाया
तूंही है तूंही है, यह सुण पाया
हेजी जदे , अंतर आनंद आवो रे
सुरता ने
बिन्द पिया वे आया जनवासा
धुरिया महेल में किया रे निवासा
हेजी जदे हंस घूंघट उघडावो रे
सुरता ने
उघड्या घूंघट पट हो गया एका
आप ही आप और नहीं देखा
हेजी फिर प्रीतम बिच समावो रे
सुरता ने
सुरता प्रीतम होय गया भेळा
बिखर गया सब खेलम-खेला
हेजी अब सब अपणे घर जावो रे
सुरता ने
ने सुरता ने
सत वचनों सुं कर लो सगाई
सम संतोष सदा मन मांही
हेजी अब, निश्चय ना रेल झळावो
रे सुरता ने
पांच विषय रो टीको देदो
पांच कोष के गाँव भी देदो
हेजी अपणे चित मांही चंवरी मंडावो
रे सुरता ने
बेफिक्री रा फूल बनावो
सुंगंध सेवरा खूब सजावो
हेजी योरे, दोनों रे गळ पहिरावो रे
मन हस्ती जो रे आगम अम्बाडी
ब्रह्म बिन्द ज्योरीं निकसी सवारी
हेजी उणने, निरती निरख सरावो रे
सुरता ने
गुरु ब्राह्मण चंवरी में आया
माया ब्रह्म रा हाथ जुडाया
हेजी उठे, कीर्ति मंगळ गावो रे
सुरता ने
56546544564545
तत्त्वं सी का शब्द सुणाया
तत्त्वं सी का मंत्र सुणाया
तूंही है तूंही है, यह सुण पाया
हेजी जदे , अंतर आनंद आवो रे
सुरता ने
बिन्द पिया वे आया जनवासा
धुरिया महेल में किया रे निवासा
हेजी जदे हंस घूंघट उघडावो रे
सुरता ने
उघड्या घूंघट पट हो गया एका
आप ही आप और नहीं देखा
हेजी फिर प्रीतम बिच समावो रे
सुरता ने
सुरता प्रीतम होय गया भेळा
बिखर गया सब खेलम-खेला
हेजी अब सब अपणे घर जावो रे
सुरता ने