Saturday, June 13, 2026

तेरे बिना मेरी कोंन खबर ले
 सांवरा गिरधारी रे।


 टीटूडी टीटावत बोली
 भारत मंड गयो भारी रे
 भारत म भंवरी का अंडा
 बचा लिया बनवारी रे

 मंझारी सूत दियो अगन म
 भांडा घडत कुम्हारी रेे
 पांचू भांडा काचा रेग्या
 खेलत सूत मंझारी रे


 द्रोपद चीर दुशासन खेंच्यो
 बा पंडवा की नारी रे
 खेंचत हारयो दुशासन
 बढ़ ग्यों चीर हजारी रे

 इन्द्र कोप कियों बृज ऊपर
 बरखा बरसे भारी रे
 बांवे नख पर गिरवर धारयो
 बचा लयी बृज सारी रे


 ध्रुव तारे प्रहलाद उबारे
 नरसी की हुण्डी स्वीकारी
 दोय कर जोड़ "शिवदत्त" जी
 गावे राखों लाज हमारी रे