Monday, June 8, 2026

 रे मन! ये दो दिन का मेला रहेगा।
 कायम न जग का झमेला रहेगा॥

 किस काम ऊँचा जो महल तू बनाएगा।
 किस काम का लाखों जो तोड़ा कमाएगा॥


 रथ-हाथियों का झुण्ड भी किस काम आएगा।
 तू जैसा यहाँ आया था वैसा हीं जाएगा॥

 तेरे हीं सफ़र में सवारी की खातिर।
 कन्धों पै गठरी का मैला रहेगा॥