Tuesday, June 9, 2026

मेरी, सुरति सुहागन जाग री

जाग री. हो जाग री..

क्या तू सो.वै, मोह नीदमें.., क्या तू सोवै

उठ के भजन बिच आ ग री

जाग री, हाँ.. जाग री

अनहर शबद, सुनो चित देके.., 

उठट मधुर धुन राग री

जाग री, हाँ.. जाग री

चरण शीश धर, विनती करिओ

पायेगी अचल सुहाग री

जाग री, हाँ.. जाग री

कहत कबीरा, सुनो भाई सा.धो.., 

सुनो भाई सा.धो

जगत पीठ दे, भाग री

जाग री, हाँ.. जाग री

हमा.रे, गुरु मिले, ब्रह्मज्ञानी

पा.ई, अमर निशानी..

काग पलट गुरु, हंसा किन्है

दीन्हीं, नाम निशानी..

हंसा पहुचे.. सुख सागर पर

मुक्ति भरै, जहाँ पानी..

जल बिच कुंभ, कुंभ बिच जल है

बाहर, भीतर पानी..

विकस्यो, कुंभ जल, जल ही समाना

ये गति, विरले ने जानी..

है अथा.ह, थाह संतन में

दरिया, लहर समानी..

जीवर, जाल डाल का करिहे

जब, मीन पिघल, भै पानी..

अनु.भव का ज्ञान, उजलता की वानी

सोहै, अकथ कहानी

कहै कबीर गुंगे की सेन

जिन जानी, उन मानी