Sunday, June 7, 2026

 निरंजन पद को साधु कोई पाता है। 

मूलद्वार से खेंच पवन को

 उल्टा पंथ चलाता है

नाभि पंकज दल में सूती 

नागन जाय उठाता है । १।

मेरुदंड की सीढ़ी बना कर 

सुन शिखर चढ़ जाता है

भ्रमर गुफा में जाय बिराजे 

जगमग ज्योत जगाता है । २।

शशि मण्डल से अमृत टपके

 पीकर प्यास बुझाता है

गगन महल में जाकर सोवे 

सुरता सेज़ बिछाता है ।३।

सब कर्मन की धूनी जलाकर 

तन में भस्म रमाता है

ब्रह्मानंद स्वरुप मगन हो 

आप ही आप समाता है ।४।