Sunday, June 7, 2026

 तेरी काया नगर का कौन धणी


तेरी काया नगर का कौन धणी,
 मारग में लुटे पांच जणी,
 हे पांच जाणी पच्चीस जणी,
 मारग में लुटे पांच जणी
 तेरी काया नगर का कौन धणी,
 मारग में लुटे पांच जणी

 हां आशा तृष्णा नदियां भारी,
बह गया संत बड़ा ब्रह्मचारी हरे हरे,
 हे जो उबरे सो शरण तिहारी,
 चमके जैसे सेल अणी,
मारग में लुटे पांच जणी
तेरी काया नगर का कौन धणी,
मारग में लुटे पांच जणी


 हां वन में लुट गया मुनीजन नंगा,
डसगई ममता उल्टा टांगा हरे हरे
 हां जाके कान गुरू नहीं लागा,
सिंह रूसी पर यान बनी,
मारग में लुटे पांच जणी,
तेरी काया नगर का कौन धणी,
मारग में लुटे पांच जणी,

 हे पांच जाणी पच्चीस जणी,
 मारग में लुटे पांच जणी
तेरी काया नगर का कौन धणी,
मारग में लुटे पांच जणी

 इंद्र बिगाड़ी गौत्रम नारी,
कुब्जा ले गया कृष्ण मुरारी हरे हरे,
राधा रुक्मण बिलखत हारी,
 हां रामचंद्र पर आन बनी,
मारग में लुटे पांच जणी,
तेरी काया नगर का कौन धणी,
 मारग में लुटे पांच जणी,
हे पांच जाणी पच्चीस जणी,
मारग में लुटे पांच जणी
तेरी काया नगर का कौन धणी,
मारग में लुटे पांच जणी

 साधु संत मिल रोके घाटा,
साधु चढ़ गया उल्टी बाटा हरे हरे,
ओघट घाटा रोक लिया रे,
पार उतारो आप धणी,
मारग में लुटे पांच जणी,
तेरी काया नगर का कौन धणी,
मारग में लुटे पांच जणी,
हे पांच जाणी पच्चीस जणी,
मारग में लुटे पांच जणी
तेरी काया नगर का कौन धणी,
मारग में लुटे पांच जणी

 साहिब कबीर गुरु दिना हेला,
धरमदास सुणो लो नित चेला हरे हरे,
माया मोह में उलझ रहा है,
 पार उतारो आप धणी,
मारग में लुटे पांच जणी,
तेरी काया नगर का कौन धणी,
मारग में लुटे पांच जणी,

हे पांच जाणी पच्चीस जणी,
 मारग में लुटे पांच जणी
तेरी काया नगर का कौन धणी,
मारग में लुटे पांच जणी