तन के तम्बूरे में
दो साँसों के तार बोले
जय सिया राम-
जय राधे शाम-
अब तो इस मन के मंदिर
में प्रभु का हुआ बसेरा,
प्रभु का हुआ बसेरा मगन हुआ
मन मेर छूटा जनम-का फेरा,
मन की मुरलिया में
सुर का सिंगार बोले –
जय सिया राम-
जय राधे शाम-
87876878787
तन के तम्बूरे में
दो साँसों के तार बोले –
लगन लगी लीलाधारी से
जगी रे जगमग ज्योति,
राम नाम का हिरा पाया
श्याम नाम का मोती,
प्यासी दो अंखियो में
आसुओं की धार बोले –
जय सिया राम-
जय राधे शाम-
तन के तम्बूरे मे
दो साँसों के तार बोले