Thursday, June 4, 2026

 रघुबर तुमको मेरी लाज

    

 रघुबर तुमको मेरी लाज

सदा सदा मैं शरण तिहारी,

 तुम हो दीन दयाल 

रघुबर तुमको मेरी लाज

पतित उधारन विरद तिहारो , 

श्रवन न सुनी आवाज

हूँ तो पतित पुरातन कहिये , 

पार उतारो जहाज रघुबर

पार उतारो जहाज .रघुबर ...

अघ खण्डन दुख भंजन जन के , 

यही तिहारो काज

रघुबर यही तिहारो काज

तुलसीदास पर किरपा कीजे , 

भक्ति दान देहु आज

रघुबर भक्ति दान देहु आज ,

रघुबर तुमको मेरी लाज