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Wednesday, June 10, 2026

  राजा मानसिंह की वाणी
 विनती अपने पुत्र की,
माता लीज्यो जान ।
आज्ञा अकबर शाह की,
 काबुल चढि़या मान ।। 

 बीच अटक दरिया बाहै,
जल की ना परनाम ।
 जल में सेना न उतरै, (गर)
 लौटे अपना मान ।।

 रघुकुल तिलक, ढूंढा़ङ रवि,
 चिरंजीव प्रिय भान ।
 यवन दमन कर लेहु जस,
 रहियो जब लग भान ।।

 रण में खड्ग चलाइया,
 कुल की ओर निहार ।
 एक वार शत्रु करै,
 आरत हाहाकार ।।

 सोच न करियो मौत को,
 माता तब बलि जाय ।
जो रण त्यागे शत्रु डर,
 मुख दिखलाजो नांय ।।