दोहा
सोरठ मीठी रागणी,
मत छेड़े प्रभात।
उड़ता पंछी गिर पड़े,
कै उठे वैराग।।
कांई जाणुं किण विद राखेला राम ।
हरिया डाल दोई पंछी बैठा
ए रट रह्यो रामजी रो नाम ।।
कांई जाणुं किण विद राखेला राम ।।
नीचे पारधी ने बाण सांधियो
ए उपर घूमे सुसाण ।।
कांई जाणुं किण विद राखेला राम ।।
दुष्ट पारधी ने नाग डसियो,
सिकरा रे लागो बाण।।
कांई जाणुं किण विद राखेला राम ।।
बाई मीरा गावे प्रभु गिरधर रा गुण,
पंछीड़ा रे भयो आराम ।।
कांई जाणुं किण विद राखेला राम ।।