Monday, June 8, 2026

इण रे आंगणिया में ए सखी
 कई नर खेलण आया । 
कई खेलिया कई नर खेलसी,
 कोई नर खेल सिधाया ॥

 इण रे आंगणिया में ए सखी 
पांच तत्व री झुपडी
 एक दिन होवे झुठी 
नैण हमारा रे झूर रया 
जैसे गागर फूटी 
इरे आंगणिया में ए सखी
 कई नर खेलण आया 
कई खेलिया कई खेलसी 
कई नर खेल सिधाया 

आवोनी पांच सहेलियां 
मेरा रंग दो सोला 
मैं तो दास गरीब हूं
 मेरा सायब गणा भोला
 इण रे आंगणिया में ए सखी
 कई नर खेलण आया 
कई खेलिया कई खेलसी 
कई नर खेल सिधाया

 आय उतरिया विकमी भोम में 
साथीड़ा पछताया थे साथिडो 
अब घर जावों 
हम हुआ पराया
 इरे आंगणिया में ए सखी 
कई नर खेलण आया 
कई खेलिया कई खेलसी
 कई नर खेल सिधाया 

आया परवोणा अमरलोक रा
 अब यहां नहीं रेणा 
क़ाज़ी मोहम्मद यूं भणे 
संतों सही कर लेणा 
इरे आंगणिया में ए सखी 
कई नर खेलण आया 
कई खेलिया कई खेलसी 
कई नर खेल सिधाया