Monday, June 8, 2026

 सतगुरु मेरा ऐसा रंग चढ़ाया, 

गुरासा ऐसा रंग चढ़ाया |

जो न उतरे तीन काल में,

 दिन दिन होत सवाया ||

श्याम श्वेत पीला नहीं नीला , 

अदभुत वर्ण बनाया |

नेत्र नहीं पहचान सकत है,

 गुरु गम भेद लखाया ||

ह्रदय वस्त्र पर रंग भक्ति का,

 लागत परम सुहाया |

ज्ञान विज्ञान लहरिया कीन्हा, 

ओढ़ परम सुख पाया ||

छीपी छाप सके नहीं वैसा,

 ना रंगरेज रंगाया |

कहन सुनन में आवत नाही, 

सतगुरु सैन बताया ||

चम्पानाथजी प्रेम के रंग में, 

रंग कत्था पहिनाया |

सहज शून्य में लगी समाधी,बठे 

अमृतनाथजी सुहाया |