#होशियार रहना रे नगर में चोर आवेगा
jhjhj mnmnu dds45567 fdddsd सब जग सुता नींद भरी
और मोहे न आवे नींद
काल खड़ा है बारने
जैसे तोरण आया बिन्द
होशियार रहना रे नगर में चोर आवेगा जाग्रत रहना रे नगर में चोर आवेगा, gfgfd 767 तीर तोप, तलवार न बरछी, न बन्दूक चलावेगा
आवत-जात नजर नही आवे वो भीतर घूम घुमावेगा।
गढ़ न तोड़े किला न तोड़े न कोई रुप दिखावेगा
इस नगारी से कोई काम नही रे, वो तुझे पकड़ ले जाएगा।
अरे धन दोलत और माल खजिना
(खजाना) यहीं धरा रह जाएगा
भाई-बन्धु और कुटुम्ब-कबीला खड़े देख रह जाएगा|
gdfgf45454 मुट्ठी बाँध कर आया जगत में
हाथ पसारे जावेगा
कहे कबीर सुनो भाई साधो, तु करनी का फल पाएगा।
होशियार रहना रे नगर में चोर आवेगा,
जाग्रत रहना रे नगर में चोर आवेगा,
|
|