वारी ओ गुरुदेव आपने बलिहारी
वारीओ गुरुदेव
आपने बलिहारी
आप नई होता जगत में
कुण करतो मरी साय
भोगता दुःख भारी
वारी ओ गुरुदेव
आपने बलिहारी
असंग जुगां को
सुतो मारो हंसलो
सद्गुरु दियो जगाई
शब्द की सिसकारी
वारी ओ गुरुदेव
आपने बलिहारी
गुरु बिन अँधा जाणिये
नहीं हे आतम ज्ञान
जगत पच हारी
वरि ओ गुरुदेव
आपने बलिहारी
यम से झगड़ा जीत कर
सुख सागर के माही
भयो आनंद भारी
वारीओ गुरुदेव
आपने बलिहारी
फूलगिरि की विनती
दुर्बल करे पुकार
अरज सुण मारी
वारी ओ गुरुदेव
आपने बलिहारी