Monday, October 2, 2023

जय जय श्री शनिदेव

               
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 जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
 सूरज के पुत्र प्रभू छाया महतारी ॥

 जय॥ श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
 नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥ 

 किरिट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
 मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥

 मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
 लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥ 

 देव दनुज ऋषी मुनी सुमरिन नर नारी ।
 विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
      
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