आरती भैरव जी की
जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा ।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा ॥
जय॥
तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक ।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥
जय॥
वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी ।
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ॥
जय॥
तुम बिन सेवा देवा सफल नहीं होवे ।
चौमुख दीपक दर्शन सबका दुःख खोवे ॥
जय॥
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी ।
कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी ॥ जय॥
पाव घूंघरु बाजत अरु डमरु डमकावत ।
बटुकनाथ बन बालकजन मन हरषावत ॥
जय॥
बटुकनाथ की आरती जो कोई नर गावे ।
कहे धरणीधर नर मनवांछित फल पावे ॥
जय॥
Tuesday, June 9, 2026
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥
लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरती गावे।
हरि ओम हरि ओम, होवे हर की आरती,
जय जय बोले, बाबा सारी आलम,
निर्भय नगारा बाजे,
अकड़ बम अकड़ बम हरदम।।
चार खूट और चोदह भवन में,
आप री फिरे हो बाबा साची या कलम,
निर्भय नगारा बाजे,
अकड़ बम अकड़ बम हरदम।।
सुख भर सुतो बाबो पाव हिलावे,
आप री गति हो बाबा आपने मालूम,
निर्भय नगारा बाजे,
अकड़ बम अकड़ बम हरदम।।
तू मारो पटवो तु ही पटवारी,
आपकी सेवा में बाबा रे हूं हरदम,
निर्भय नगारा बाजे,
अकड़ बम अकड़ बम हरदम।।
चार चरण जद गोरख बोले,
बेग रे भगता री बाबा राख जो कलम,
निर्भय नगारा बाजे,
अकड़ बम अकड़ बम हरदम।।
ओम सत्य ओम सत्य,होवे हर की आरती,
हरि ॐ हरि ॐ, होवे हर की आरती,
जय जय बोले, बाबा सारी आलम,
निर्भय नगारा बाजे,
अकड़ बम अकड़ बम हरदम।।
जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी॥
माँग सिन्दूर विराजत,
टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना,
चन्द्रवदन नीको॥
878585566756765
कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला,
कण्ठन पर साजै॥
के हरि वाहन राजत,
खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत,
तिनके दुखहारी॥
कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर,
सम राजत ज्योति॥
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,
महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना,
निशिदिन मदमाती
जय लक्ष्मीरमणा श्री जय लक्ष्मीरमणा।
सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा॥
जय लक्ष्मीरमणा।
रत्नजड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे।
नारद करत निराजन घंटा ध्वनि बाजे॥
जय लक्ष्मीरमणा।
b5
प्रगट भये कलि कारण द्विज को दर्श दियो।
बूढ़ो ब्राह्मण बनकर कंचन महल कियो॥
जय लक्ष्मीरमणा।
दुर्बल भील कठारो इन पर कृपा करी।
चन्द्रचूड़ एक राजा जिनकी विपति हरी॥
जय लक्ष्मीरमणा।
ytry65r
वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दीनी।
सो फल भोग्यो प्रभुजी फिर स्तुति कीनी॥
जय लक्ष्मीरमणा।
भाव भक्ति के कारण छिन-छिन रूप धर्यो।
श्रद्धा धारण कीनी तिनको काज सर्यो॥
जय लक्ष्मीरमणा।
आरती कुंजबिहारी की
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली;
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक;
ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै;
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग;
अतुल रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती भगवान गंगाधर
ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा ।
त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा ॥
हर हर हर महादेव ॥ १॥
कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रुमविपिने ।
गुञ्जति मधुकरपुञ्जे कुञ्जवने गहने ॥
कोकिलकूजित खेलत हंसावन ललिता ।
रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता ॥
हर हर हर महादेव ॥ २॥
तस्मिल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता ।
तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता ॥
क्रीडा रचयति भूषारञ्जित निजमीशम् ।
इन्द्रादिक सुर सेवत नामयते शीशम् ॥
हर हर हर महादेव ॥ ३॥
बिबुधबधू बहु नृत्यत हृदये मुदसहिता ।
किन्नर गायन कुरुते सप्त स्वर सहिता ॥
धिनकत थै थै धिनकत मृदङ् वादयते ।
क्वण क्वण ललिता वेणुं मधुरं नाटयते ॥
हर हर हर महादेव ॥ ४॥
रुण रुण चरणे रचयति नूपुरमुज्ज्चलिता ।
चक्रावर्ते भ्रमयति कुरुते तां धिक ताम् ॥
तां तां लुप चुप तां तां डमरू वादयते ।
अंगुष्ठांगुलिनादं लासकतां कुरुते ॥
हर हर हर महादेव ॥ ५॥
कर्पूरद्युतिगौरं पञ्चाननसहितम् ।
त्रिनयनशशिधरमौलिं विषधरकण्ठयुतम् ॥
सुन्दरजटाकलापं पावकयुतभालम् ।
डमरुत्रिशूलपिनाकं करधृतनृकपालम् ॥
हर हर हर महादेव ॥ ६॥
मुण्डै रचयति माला पन्नगमुपवीतम् ।
वामविभागे गिरिजारूपं अतिललितम् ॥
सुन्दरसकलशरीरे कृतभस्माभरणम् ।
इति वृषभध्वजरूपं तापत्रयहरणम् ॥
हर हर हर महादेव ॥ ७॥
शङ्खनिनादं कृत्वा झल्लरि नादयते ।
नीराजयते ब्रह्मा वेदकऋचां पठते ॥
अतिमृदुचरणसरोजं हृत्कमले धृत्वा ।
अवलोकयति महेशं ईशं अभिनत्वा ॥
हर हर हर महादेव ॥ ८॥
ध्यानं आरति समये हृदये अति कृत्वा ।
रामस्त्रिजटानाथं ईशं अभिनत्वा ॥
संगतिमेवं प्रतिदिन पठनं यः कुरुते ।
शिवसायुज्यं गच्छति भक्त्या यः शृणुते ॥
हर हर हर महादेव ॥ ९॥
ॐ जय शिव ओंकारा हर शिव ओंकारा
ब्रम्हा विष्णु सदाशिवअर्ध्नागी धारा
ॐ जय शिव ओंकारा.
एकानन चतुरानन पंचांनन राजे
हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे
ॐ जय शिव ओंकारा
878768678
दो भुज चार चतुर्भज दस भुजअति सोहें
तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें
ॐ जय शिव ओंकारा…
अक्षमाला, बनमाला, रुण्ड़मालाधारी
चंदन, मृदमग सोहें, भाले शशिधारी
ॐ जय शिव ओंकारा.
श्वेताम्बर,पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें
सनकादिक,ब्रम्हादिक,भूतादिक संगें
ॐ जय शिव ओंकारा…
कर के मध्य कमड़ंल चक्र त्रिशूल धरता
जगकर्ता, जगभर्ता, जगसंहारकर्ता
ॐ जय शिव ओंकारा.
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
प्रवणाक्षर के मध्यें ये तीनों एका
ॐ जय शिव ओंकारा.
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावें
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें
ॐ जय शिव ओंकारा.
Saturday, June 6, 2026
ओम जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
क्षण में दूर करे
ओम जय जगदीश हरे
जो ध्यावे फल पावे दुःख बिनसे मन का
सुख सम्पति घर आवे कष्ट मिटे तन का
ओम जय जगदीश हरे
मात पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी
तुम बिन और न दूजा आस करूं जिसकी
ओम जय जगदीश हरे
तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर तुम सब के स्वामी
ओम जय जगदीश हरे
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता
मैं मूरख फलकामी कृपा करो भर्ता
ओम जय जगदीश हरे
तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं गोसाई तुमको मैं कुमति
ओम जय जगदीश हरे
दीन बन्धु दुःख हर्ता तुम ठाकुर मेरे
अपने हाथ उठाओ द्वार पड़ा तेरे
ओम जय जगदीश हरे
विषय विकार मिटाओ पाप हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ सन्तन की सेवा
ओम जय जगदीश हरे
ओम जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट
क्षण में दूर करे
ओम जय जगदीश हरे
Monday, October 2, 2023
जय जय श्री शनिदेव
|
|---|