Tuesday, June 9, 2026

 जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी।
 तुमको निशिदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी॥

 माँग सिन्दूर विराजत,
 टीको मृगमद को।
 उज्जवल से दोउ नैना,
 चन्द्रवदन नीको॥
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 कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै।
 रक्तपुष्प गल माला,
 कण्ठन पर साजै॥
 के हरि वाहन राजत,
खड्ग खप्परधारी।


 सुर-नर-मुनि-जन सेवत,
 तिनके दुखहारी॥
 कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती।
 कोटिक चन्द्र दिवाकर,
 सम राजत ज्योति॥

 शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,
महिषासुर घाती।
 धूम्र विलोचन नैना,
 निशिदिन मदमाती