जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी॥
माँग सिन्दूर विराजत,
टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना,
चन्द्रवदन नीको॥
878585566756765
कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला,
कण्ठन पर साजै॥
के हरि वाहन राजत,
खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत,
तिनके दुखहारी॥
कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर,
सम राजत ज्योति॥
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,
महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना,
निशिदिन मदमाती