Tuesday, June 9, 2026

ॐ जय शिव ओंकारा  हर शिव ओंकारा
 ब्रम्हा विष्णु सदाशिवअर्ध्नागी धारा
 ॐ जय शिव ओंकारा.

 एकानन चतुरानन पंचांनन राजे
 हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे
ॐ जय शिव ओंकारा

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 दो भुज चार चतुर्भज दस भुजअति सोहें
तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें
 ॐ जय शिव ओंकारा…

 अक्षमाला, बनमाला, रुण्ड़मालाधारी
चंदन, मृदमग सोहें, भाले शशिधारी
ॐ जय शिव ओंकारा.

 श्वेताम्बर,पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें
सनकादिक,ब्रम्हादिक,भूतादिक संगें
ॐ जय शिव ओंकारा…

 कर के मध्य कमड़ंल चक्र त्रिशूल धरता
 जगकर्ता, जगभर्ता, जगसंहारकर्ता
ॐ जय शिव ओंकारा.


 ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
प्रवणाक्षर के मध्यें ये तीनों एका
 ॐ जय शिव ओंकारा.

 त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावें
 कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें
ॐ जय शिव ओंकारा.