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Tuesday, June 9, 2026

आरती भैरव जी की

जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा ।
 जय काली और गौरा देवी कृत सेवा ॥
जय॥

 तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक ।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥
 जय॥


 वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी ।
 महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ॥
 जय॥

 तुम बिन सेवा देवा सफल नहीं होवे ।
चौमुख दीपक दर्शन सबका दुःख खोवे ॥
 जय॥


 तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी ।
कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी ॥ जय॥

 पाव घूंघरु बाजत अरु डमरु डमकावत ।
 बटुकनाथ बन बालकजन मन हरषावत ॥
 जय॥

 बटुकनाथ की आरती जो कोई नर गावे ।
 कहे धरणीधर नर मनवांछित फल पावे ॥
जय॥