Sunday, June 7, 2026


 राम सुमर मेरा भाई रे...
तेरी बणत बणत बण जाई रे
 कीलिया राम सुमर मेरा भाई रे।।

चित्त चेतन का भूण बणाया,
 ज्ञान गुड्डी ठहराई रे।
सत शब्दा की किल्ली दे कर,
ठेठ ज्याय ठहराई रे।।


तन को चडसियो
मन की मांडल,
लोभ की लाव घलाई ।
 राम नाम का कड़ा लगाया,
चाठ बणी महाभाई।।

 शब्द कुएं पर ईख बोयडी,
कोई मीठी कोई खारी।
 मीठी मीठी साधा खाई,
 खारी जग भरमाई रे ।।


काट बाट गाट म गेरी,
 पांच बळदिया गाई ।
 कह "लिखमो" गुरांजी के शरणे,
भाग लिखी सो पाई।।