म्हाने परदेशा क्युं छोडया
म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
सदगुरूले चालो नि ज देश
यो नही मारो देश रंगीला
यो नहीं मारो देश।
प्रिया प्रीतम की कुंज बसाओ
जहां रंगरली हमेश।।१
म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
सदगुरूले चालो नि ज देश
दया करी सहचरी बनाओ,
सोलह बरस को भेष।
लाल गुलाब सजा दो प्यारा,
घुंघराला केश।।२
म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
सदगुरूले चालो नि ज देश
तड़प तड़प के मै दुख पाऊं,
कोई नहीं है हितेश।
थांको ही माने बड़ो आसरो,
काटो करम कलेश।।३
म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
सदगुरूले चालो नि ज देश
देख माने सब हंसे हंसावे,
बात करे विशेष।
जुगलमाधुरी ने ले चालो,
काई कहुं अब शेष।।
माने ले चलो निज देश।
म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
सदगुरूले चालो नि ज देश