Sunday, June 7, 2026

 म्हाने परदेशा क्युं छोडया 

म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
 सदगुरूले चालो नि ज देश

 यो नही मारो देश रंगीला
यो नहीं मारो देश।
प्रिया प्रीतम की कुंज बसाओ
 जहां रंगरली हमेश।।१


 म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
 सदगुरूले चालो नि ज देश

 दया करी सहचरी बनाओ,
सोलह बरस को भेष।
लाल गुलाब सजा दो प्यारा,
घुंघराला केश।।२


 म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
 सदगुरूले चालो नि ज देश

 तड़प तड़प के मै दुख पाऊं,
कोई नहीं है हितेश।
थांको ही माने बड़ो आसरो,
 काटो करम कलेश।।३


 म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
 सदगुरूले चालो नि ज देश

 देख माने सब हंसे हंसावे,
बात करे विशेष।
जुगलमाधुरी ने ले चालो,
 काई कहुं अब शेष।।


माने ले चलो निज देश।
 म्हाने परदेशा क्युं छोडया .
 सदगुरूले चालो नि ज देश