कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर
राम राम राम राम राम राम राम राम राम
सोरठ तब ही छेड़िये, जबसोपो पड़ जाय । चतुर बेण उठ सुणे है, मूरख नींद घुराय ॥
कीना क्यूं नहीं ब्रजरा मोर, कीना क्यूं नहीं ब्रजरा मोर उधव म्हाने, कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥
ब्रज में रेवता सांवरा वन फल खाता उड़ता पंख मरोड़, उधव म्हाने, कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥
उमड़ घुमड़ कर आई रे बदरिया रे । घटा छाई घन घोर,उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ।।
दादुर मोर पपीहा बोले रे । कोयल करत किलोर, उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥
माता यशोदा चुगो चुगाती रे । गहरा बोले नंद जी री पोल,उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥
पाँख गिरे ने म्हारीकृष्ण उठावे र टोकत नन्द किशोर, उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ।
बाई मीरां कहे प्रभु, गिरधर रा गुण रे । मरूधर नगर कठोर, उधव म्हाने कीनाक्यूं नी ब्रज रा मोर ॥ उधव म्हाने कीनाक्यूं नी ब्रज रा मोर ॥ उधव म्हाने कीनाक | राम राम राम राम राम राम राम राम राम |