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Friday, September 29, 2023

कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर

राम राम राम राम राम राम राम राम राम

सोरठ तब ही छेड़िये,
जबसोपो पड़ जाय ।
चतुर बेण उठ सुणे है,
मूरख नींद घुराय ॥

कीना क्यूं नहीं ब्रजरा मोर, 
कीना क्यूं नहीं ब्रजरा मोर
 उधव म्हाने, कीना  क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥

ब्रज में रेवता सांवरा वन फल खाता
 उड़ता पंख मरोड़,
उधव म्हाने, कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥


उमड़ घुमड़ कर आई रे बदरिया रे ।
घटा छाई घन घोर,उधव म्हाने
 कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ।।

दादुर मोर पपीहा बोले रे ।
कोयल करत किलोर,
उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥


माता यशोदा चुगो चुगाती रे ।
गहरा बोले नंद जी री पोल,उधव म्हाने
कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ॥

पाँख गिरे ने म्हारीकृष्ण उठावे
र टोकत नन्द किशोर,
उधव म्हाने कीना क्यूं नी ब्रज रा मोर ।


बाई मीरां कहे प्रभु, गिरधर रा गुण रे ।
मरूधर नगर कठोर,
उधव म्हाने कीनाक्यूं नी ब्रज रा मोर ॥ 
उधव म्हाने कीनाक्यूं नी ब्रज रा मोर ॥
 उधव म्हाने कीनाक
  राम राम राम राम राम राम राम राम राम