Saturday, September 30, 2023

सुणजो रे संसारी लोगो ऐड़ो जमानो आवेला,


सुणजो रे संसारी लोगो
 ऐड़ो जमानो आवेला, 
राजारामजी कहे मेरे बंदव
कर्म धर्म मिट जावेला
 
एक सेर रो धान बिकेला,
पानी टांक तुलावेला, 
भूमि बीज उपज तज देसी 
इंद्र नही बरसावे ला

 मनको बढ़ जासी ज्यादा
धान हाथ नहीं आवेला, 
एक रोटी रे कारण लड़ कर
अपनो पराण गवावे ला 

दान पुण्य में धयान न धरसी
पाप गानों बढ़ जावेला ,
देवा ने पूजे नही पापी 
ईस्वर ने नही धवेल....... 

राजा खुद तो राज तजसी 
जागीरी सब जावेला 
पूंजी पति तो एक पलक में 
निर्धनिया हो जावेला 

ने भाई नहीं जाने 
नार नही रेवेला, 
थारी मारी करता करता 
यु लड़ता मर जावेला 

सासरिया रे सिरो लापसी
 उजली खीर रंदावेला, 
काका बाबा ओर मात पिता ने
 गाली देन भगावेला, 

बेटो बाप रो कयो नई माने 
अकड़ तनो अकड़ावेला, 
बुढ़िया में एकल नही है 
पागल के बतलावेला 

नेम धर्म सगळो तज देसी 
सब दिन पैसा कमावेला,
 ईस्वर ने ईस्वर नही जाने 
आप भृमा बन जावेला, 

टाबर ने रोटी नही मिलसी 
सब दिन सोर मसावेला, 
भूका मिरता फिरे भटकता 
धान हाथ नहीं आवेला, 

महामारी ओर हैजो पड़सी 
हाहाकार मस जावेला 
काली माता तो सक्कर सलावे 
भेरू डमरू बजावेला, 

सासुजी तो गठी फेरे 
सुसरो पानी लावेला,
 ढोलिये बेठोडी बनड़ी 
सु डरावेला, 

जात पात री रीत न रेसी 
एक जात बन जावेला, 
राजारामजी कहे मेरे बांधव 
कर्म धर्म हठ जावेला,






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