Sunday, October 1, 2023

रंग रंग का फूल खिले रे

                 
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म्हारी राम बाग गुलजार,
 म्हारी हरी बाग गुलजार,
 रंग रंग का फूल खिले रे,
 रंग रंग के फूल खिले रे।

 तख्त चार चौरासी रे क्यारी,
 जिनकी सड़का न्यारी रे न्यारी,
 पेड़ों से पेड़ बड़े रे,
 रंग रंग का फूल खिले रे।
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 कुआं ईणा रे बाग के माई,
 धोरा तीन लाग्या वाका माई,
 कुआं से तो बाग पीवे रे,
 रंग रंग रा फूल खिले रे।


 मालण इणा बाग के माई
 भर धोभा फूलन का या लाई,
 मुख आगे तो लाईने धरे रे,
 रंग रंग का फूल खिले रे।

 मंछा रे मालण माला रे पोई,
 दिल चाहे लई जावो रे कोई,
 देवन का तो शीश चढ़े रे,
 रंग रंग का फूल खिले रे।


 रामानंद गुरु माला रे दीनी,
 साहब कबीर ने प्रेम कर लीनि,
 घट माई तो माला फिरे रे,
 रंग रंग का फूल खिले रे।।    

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