Sunday, October 1, 2023

अरे गुरु सरीखा देव हमारे मन भावे

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 गुरु की वाणी अटपटी,
झटपट लखी ना जाए,
जो जन झटपट लखी ले,
वाकी खटपट ही मिट जाए।

 अरे गुरु सरीखा देव हमारे मन भावे,
 सदा मन भावे,
 गुरु काटे करम की जाळ,
 जीव सुख पावै,
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 अरे वा गुराजी की सैंण समझकर ध्यावे,
भई वो नर संत सुजान जीव डुल जावे

अरे वा गुराजी की सैंण समझकर ध्यावे,
 भई वो नर संत सुजान जीव डुल जावे,

 अरे इंगला रे पिंगला नारी सुखमणा को धावे, 
भई अरध उरध रा बिच मन ठहरावे,
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 अरे एक अखंडित नाथ चराचर धावे,
  भई सकल ब्रह्म के माय वेद यूँ गावे,

 अरे बोल्या ईश्वरदास भरम ने भगावे,
 भई शीतल चरणों के माय सदा सुख पावे,


गुरु काटे करम की जाळ,
 जीव सुख पावै,
 गुरु काटे करम की जाळ,
 जीव सुख पावै।

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