Monday, October 2, 2023

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन

               
         yutu6u8654  r66      
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
 हरण भवभय दारुणम्।
 नव कंज लोचन, कंज मुख कर
 कंज पद कंजारुणम्॥
ut7u
 कन्दर्प अगणित अमित छवि,
 नव नील नीरद सुन्दरम्।
 पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि
 नौमि जनक सुतावरम्॥

ytry6765655t
 भजु दीनबंधु दिनेश दानव
 दैत्य वंश निकन्दनम्।
 रघुनन्द आनन्द कन्द कौशल
 चन्द्र दशरथ नन्द्नम्॥

 सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू
 उदारु अंग विभूषणम्।
 आजानुभुज शर चाप-धर,
 संग्राम जित खरदूषणम्॥

 इति वदति तुलसीदास,
 शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
 मम ह्रदय कंज निवास कुरु,
 कामादि खल दल गंजनम्॥
.
 मन जाहि राचेऊ मिलहि सो वर
सहज सुन्दर सांवरो।
 करुणा निधान सुजान
शील सनेह जानत रावरो॥ 

         fdfggdfgdfgdfdffdgfgfddfg dfg