भाव राखजो भक्ति थोरी वेला नाम से मुक्ति । साधु सदा ही भेला नही आवे जम नेङा ॥
सतगुरु मिलिया पागी मारी सुरता चुनरी जागी । मारों मनङो भयो वैरागी सिमरण कुछी लागी ॥
तीन पाँच से न्यारा वे सायब ने प्यारा । हाले खडक री धारा जिणे देख्या दीदारा ॥
रंग पाचोरा मिटिया करम धरम सब कटिया । निज नाम ने रटिया जो काल देख ने डटिया ||
नदी समुंदर एका ज्योरा मटिया दिल रा धोका । सतगुरु मिलिया अनोखा इण नजरों सू देखा ॥
ना दिवलो ना बाती भाई ना दिवस ना राती । बोलियाँ बगसो जी खाती अमरापुर रा वासी ॥ fdddddddddfdfddfdfdfdfdfdfdddddfdfdfddffddd |