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Wednesday, June 10, 2026

 कलालण एसो प्यालो पाय
जाने पियाँ से अमर हो जाय

गगन मंडल भट्टियां तपे जी
ताप रहा दिन रात
सुरत कलालण प्यालो फेर
बोतलडी भर ल्याय
hghghffghfg
 गगन मण्डल भट्टियां तपे
झरणा रो बंद लगाय
 मन मतवालो हो रयो जी
सुरतां बणी है दलाल

यो प्यालो निज नाम को
जी झाड़ राँग को नाय
 सुरां माणस पीव पीव जाव
 नुगरा मूढ़ गमाय


प्यालो पीवो जुग जुग जीवो
जीव अमर हो जाय
कहत कबीर सुणो भाई साधों
फेर जन्म आसी नाय