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Saturday, July 4, 2026

 मारा मूळ महल के माहि  गणेशानन्दा  



  
 

मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
रिद्धि सिद्धि ढोले वाय हुए आनन्दा है 

 मारा सद्गुरु ओ दातार काट दिया फंदा
 मुझको तो सूझे नहीं जनम का अँधा हु 
 मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा


 भई पीळा रंग पछाण चार है झंडा
 चारा ऋ पाँख पिछाण गज रही गंगा है 
 मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा

 भाई धरा गगन के बिच खेल कर बंदा
 मारा कंठ कमल के माहि राम जी जिन्दा है 
 मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा


 भई सद्गुरु दर्शन पाई हुए आनन्दा
 गुण गावे यो गौरखनाथ रूप सोऽहं का है 
 मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा