मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
रिद्धि सिद्धि ढोले वाय हुए आनन्दा है
मारा सद्गुरु ओ दातार काट दिया फंदा
मुझको तो सूझे नहीं जनम का अँधा हु
मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
भई पीळा रंग पछाण चार है झंडा
चारा ऋ पाँख पिछाण गज रही गंगा है
मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
भाई धरा गगन के बिच खेल कर बंदा
मारा कंठ कमल के माहि राम जी जिन्दा है
मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
भई सद्गुरु दर्शन पाई हुए आनन्दा
गुण गावे यो गौरखनाथ रूप सोऽहं का है
मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
मारा सद्गुरु ओ दातार काट दिया फंदा
मुझको तो सूझे नहीं जनम का अँधा हु
मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
भई पीळा रंग पछाण चार है झंडा
चारा ऋ पाँख पिछाण गज रही गंगा है
मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
भाई धरा गगन के बिच खेल कर बंदा
मारा कंठ कमल के माहि राम जी जिन्दा है
मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा
भई सद्गुरु दर्शन पाई हुए आनन्दा
गुण गावे यो गौरखनाथ रूप सोऽहं का है
मारा मूळ महल के माहि गणेशानन्दा