Sunday, October 1, 2023

जोबन धन प्रांमणा रे दोई दिन चारा

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 जोबन धन पामणा  दिन चारा
जेरो गरव मत करो रे गंवारा

 हाड रे मांस रा बनया रे पिंजरा
भीतर भरया रे भंगारा
ऊपर रंग सुचंग चढ़ाया
कारीगर है किलतारा
 जोबन धन पामणा रे

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 पशु रे चाम रा बनया रे पनईया
नौबत बनया रे नगारा
नर तेरी चाम काम नहींआवे
बड़ जल हुआ रे अंगारा
जोबन धन प्रामणा रे


 दस शीश जेरा बीस भुजावा
 रिद्धि सिद्धि बहु परिवारा
एवा रे नर गरब माँ गळ गया
लंका रा पति सिरदारा
 
सपने री माया सुकृत
करो रे व्यवहारा
कहत कबीर सुनो भाई साधो
भव जल से उतरो पारा
 जोबन धन 
पामणा रे…    
   
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