जोगी रेवो सद्गुरु दास,
गुरु थाँने देवे ब्रह्म प्रकाश | |
बिना पर बिन अधर उडणो,
रहणों अधर अकाश । .
देव-विधि सूँ देव लखणो,
जद मिटेला फाँस ||१ ||
बिना मुख बिन बोल बाणी,
जीवणो बिन श्वास ।
बिना नैणाँ देख सब कुछ,
जद मिटेला त्रास ॥ २ ॥
बिना कानाँ पैर मुद्रा,
बिना वस्त्र संन्यास ।
बिना खेचरी पियो अमृत,
सोइ सूर श्याबास | | ३ ||
देवनाथ पकड़यो हाथ,
उठे जात कौन विनाश ।
मान मिल गयो महान् में,
करके कुल को नाश ॥ ४ ॥