Wednesday, June 10, 2026




जोगी रेवो सद्गुरु दास,
 गुरु थाँने देवे ब्रह्म प्रकाश | |

बिना पर बिन अधर उडणो,
रहणों अधर अकाश । .
 देव-विधि सूँ देव लखणो,
जद मिटेला फाँस ||१ ||


 बिना मुख बिन बोल बाणी,
जीवणो बिन श्वास ।
बिना नैणाँ देख सब कुछ,
जद मिटेला त्रास ॥ २ ॥

 बिना कानाँ पैर मुद्रा,
बिना वस्त्र संन्यास ।
 बिना खेचरी पियो अमृत,
 सोइ सूर श्याबास | | ३ ||


देवनाथ पकड़यो हाथ,
 उठे जात कौन विनाश ।
 मान मिल गयो महान् में,
          करके कुल को नाश ॥ ४ ॥