| वारी ओ गुरुदेव आपने बलिहारी आप नई होता जगत में कुण करतो मरी साय भोगता दुःख भारी वारी ओ गुरुदेव आपने बलिहारी असंग जुगां को सुतो मारो हंसलो सद्गुरु दियो जगाई शब्द की सिसकारी वारी ओ गुरुदेव आपनेबलिहारी गुरु बिन अँधा जाणिये नहीं हे आतम ज्ञान जगत पच हारी वरि ओ गुरुदेव आपने बलिहारी यम से झगड़ा जीत कर सुख सागर के माही भयो आनंद भारी वारी ओ गुरुदेव आपने बलिहारी फूलगिरि की विनती दुर्बल करे पुकार अरज सुण मारी वारी ओ गुरुदेव आपने बलिहारी |
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