Saturday, November 18, 2023

रंगमहल के दस दरवाज़े

           
 रंगमहल के दस दरवाज़े
 ना जाने कौन सी खिड़की खुली थी
 सय्याँ निकस गये
 मैं ना लड़ी थी

 सर को झुकाये मैं तो
 चुपके खड़ी थी
 सय्याँ निकस गये
 मैं ना लड़ी थी

 पिया कौन गली गये श्याम
 मोरी सुध ना लीन्हीं
हाय राम
 पिया कौन गली गये श्याम

 अंग मेरे गहने
 प्यासी उमरिया
 जोगन हो गई
मैं बिन सँवरिया

 हाथों में मेरे
 मेहंदी रची थी
 मेहंदी में मेरे
अँसुवन की लड़ी थी
 सय्याँ निकस गये
 मैं ना लड़ी थी

 छोड़ पिया घर नैहर जाऊँ
 वंदे हरि अब सीश झुकाऊँ
 कर सिंगार मैं दुल्हन बनी थी
 ऐसी दुल्हन से कुँवारी भली थी
 सय्याँ निकस गये
मैं ना लड़ी थी