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Tuesday, June 9, 2026

 सन्त हरदेवराम जी की वाणी 
 (मध्यमा)

साधो भाई गुरु बिन कौण छुड़ावे ।
 उलझ रियो आफत में आन्धो,
भव जल गोता खावे । टेिर ।।


 जोधा चार पकड़ लियो सेंटो,
 चारों चंडी भरमावे ।
 पाँचो चार खींच ले जावे,
पल-पल में उचकावे ॥१॥

पच्चीस नारी पिछाड़ी लागी,
 कैसे कर थिर जावे
आठों पहर पड़यो फन्द माँये,
 फिर फिर चक्कर लगावे IR ॥


 सतगुरु देव जादूगर पूरा,
शब्दा की मार लगावे ।
सबको मार हटावे दूराँ,
जब आनन्द घर आवे ॥३॥

रामधन हंस सतगुरु मिलिया,
भिन्न भिन्न कर समझावे ।
 'हरदेवराम' का धोका मिट गया,
मोक्ष परम पद पावे ॥ ४ ॥