सन्त हरदेवराम जी की वाणी
(मध्यमा)
साधो भाई गुरु बिन कौण छुड़ावे ।
उलझ रियो आफत में आन्धो,
भव जल गोता खावे । टेिर ।।
जोधा चार पकड़ लियो सेंटो,
चारों चंडी भरमावे ।
पाँचो चार खींच ले जावे,
पल-पल में उचकावे ॥१॥
पच्चीस नारी पिछाड़ी लागी,
कैसे कर थिर जावे
आठों पहर पड़यो फन्द माँये,
फिर फिर चक्कर लगावे IR ॥
सतगुरु देव जादूगर पूरा,
शब्दा की मार लगावे ।
सबको मार हटावे दूराँ,
जब आनन्द घर आवे ॥३॥
रामधन हंस सतगुरु मिलिया,
भिन्न भिन्न कर समझावे ।
'हरदेवराम' का धोका मिट गया,
मोक्ष परम पद पावे ॥ ४ ॥