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Thursday, June 4, 2026

आनंद का बाजा बाजे जी गगन महल के माहि। 

  

आनंद का बाजा बाजे  जी 

गगन महल के माहि। 

जंहा पाया मैं  शब्द  अनोखा ,

मारा मिट गया मन  का  धोखा ,

जंहा लागा भेंट अनुभव का ,

दशों द्वारा पाई। 

जंहा लागी  शबद  की कूंची ,

मरी सुरता चढ़ गई ऊँची ,

प्रीतम का महल में पहुँची ,

गई चरणा  लिपटाय। 

जंहा सूरत शबद  का मेला ,

वहां मिल गया पीव रँगीला ,

कोई विरला संत पँहुचेला ,

ज्ञान रतन धन पाय। 

अब पाया देश दीवाना ,

मेरा मिट गया आना जाना ,

अब पद पाया निर्बाना ,

चेतन भारती  गाई।