आनंद का बाजा बाजे जी गगन महल के माहि।
आनंद का बाजा बाजे जी
गगन महल के माहि।
जंहा पाया मैं शब्द अनोखा ,
मारा मिट गया मन का धोखा ,
जंहा लागा भेंट अनुभव का ,
दशों द्वारा पाई।
जंहा लागी शबद की कूंची ,
मरी सुरता चढ़ गई ऊँची ,
प्रीतम का महल में पहुँची ,
गई चरणा लिपटाय।
जंहा सूरत शबद का मेला ,
वहां मिल गया पीव रँगीला ,
कोई विरला संत पँहुचेला ,
ज्ञान रतन धन पाय।
अब पाया देश दीवाना ,
मेरा मिट गया आना जाना ,
अब पद पाया निर्बाना ,
चेतन भारती गाई।