दरबार में मेरे सद्गुरु के
दरबार में मेरे सद्गुरु के
दुःख दर्द मिटाये जाते है।
दुनियां के सताये लोग यहां
सीने से लगाए जाते है
तुम डरते हो ए जग वालों ,
इस दर पे शीश झुकने में
ए नादानो इस दर पे तो
सर भेंट चढ़ाए जाते है
दरबार में मेरे सद्गुरु के
दुःख दर्द मिटाये जाते है।
ये महफ़िल है मस्तानों की
हर शख्स यहां पर मतवाला
भर भर के जैम इबादत के
यहां सबको पिलाये जाते है
दरबार में मेरे सद्गुरु के
दुःख दर्द मिटाये जाते है।
इल्जाम लगाने वालों ने
इल्जाम लगाए लाख मगर
तेरी सौगात समझ कर के
हम सर पे उठाए जाते है
दरबार में मेरे सद्गुरु के
दुःख दर्द मिटाये जाते है।
जिन प्यारो पर ए जग वालो हो
खास इनायत सद्गुरु की
उनको ही संदेसा आता है
और वो ही बुलाए जाते है
दरबार में मेरे सद्गुरु के
दुःख दर्द मिटाये जाते है।