साँवरिया का दर पे देखो , घणा जातरी आया।
साँवरिया का दर पे देखो ,
घणा जातरी आया।
कोई मांगे काली गाडी ,
कोई धन ओर माया ,
कोई मांगे गौरी लाडी ,
कोई सुन्दर काया। १।
साँवरिया का दर पे देखो ,
घणा जातरी आया।
कोटि कोटि धन निपजे जी ,
दिन दिन होय सवाया ,,
रोज नवा सिणगार धरावै
मनडा ने है लुभाया । २।
साँवरिया का दर पे देखो ,
घणा जातरी आया।
रोज रोज को मेळो लागे ,
भीड़ का पार न पाया ,
घुड़ता पड़ता धक्का खाता
थांके दर पे आया । ३।
साँवरिया का दर पे देखो ,
घणा जतरी आया।
"अविराज" की विनती दाता ,
अवगुण मेरा भुलाया ,जो कुछ है सो आप दियो दाता ,
सूता आय जगाया। ।
