Sunday, June 7, 2026

 श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन

 हरण भवभय दारुणम् .

नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुखकर

 कञ्जपद कञ्जारुणम् .

कंदर्प अगणित अमित छबि नव

 नील नीरज सुन्दरम् .

पटपीत मानहुं तड़ित रुचि सुचि

 नौमि जनक सुतावरम् .

भजु दीन बन्धु दिनेश दानव 

दैत्यवंशनिकन्दनम् .

रघुनन्द आनंदकंद कोशल 

चन्द दशरथ नन्दनम् .

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु

 उदार अङ्ग विभूषणम् .

आजानुभुज सर चापधर सङ्ग्राम 

जित खरदूषणम् ..

इति वदति तुलसीदास शङ्कर 

शेष मुनि मनरञ्जनम् .

मम हृदयकञ्ज निवास कुरु

 कामादिखलदलमञ्जनम् .