Monday, October 2, 2023

जसोदा हरि पालनैं झुलावै

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 जसोदा हरि पालनैं झुलावै ।

 हलरावै, दुलराइ मल्हावै,
 जोइ-जोइ कछु गावै॥
 मेरे लाल कौं आउ निंदरिया,
 काहैं न आनि सुवावै
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 तू काहैं नहिं बेगहिं आवै,
 तोकौं कान्ह बुलावै॥
 कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं,
 कबहुँ अधर फरकावै ।
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 सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि,
 करि-करि सैन बतावै॥
 इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि
 जसुमति मधुरैं गावै ।

 जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ,
 सो नँद-भामिनि पावै॥
 
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