Thursday, June 4, 2026

 तू चेतन खुदा खुद आप है ,  

 फिर धरता  किसका ध्याना।




     तू चेतन खुदा खुद आप है ,
 फिर धरता किसका ध्याना। 

 तू ही खंड ओर पिण्ड बखाना ,
 तू ही ब्रम्हांड में जोत जगाना ,
 बाहर भीतर क्यूँ भटकाना।
 जपता किसका जाप ,
 सब माया माही भुलाना।


 तू चेतन खुदा खुद आप है ,
 फिर धरता किसका ध्याना 

 तू ही ईश्वर ब्रह्मः कहाना ,
तू ही आतम परमातम माना ,
सगुण निर्गुण तू ही ठहराना।
 कहाँ गया घर घाप रे ,
तज दे सर्व अज्ञाना।


 तू चेतन खुदा खुद आप है ,
 फिर धरता किसका ध्याना। 

तुझ से भीन्न कहो कह ज्ञाना ,
 जाग्रत जान पारख स्थाना ,
गाफिल दशा को दूर हटाना।
 दूजा न कोई बाप है ,
नित समय स्वरूप समाना


 तू चेतन खुदा खुद आप है ,
 फिर धरता किसका ध्याना। 

अमर अलौकिक रूप तुम्हारा ,
जनम मरण माया से न्यारा ,
सत्य सनातन संत पुकारा ,
गरिबा ज्ञान अताप है ,
नित ज्यूँ का त्यूं बलवाना।


 तू चेतन खुदा खुद आप है ,

 फिर धरता किसका ध्याना।