उनके दर पे पहुचने तो पायें
उनके दर पे पहुचने तो पायें, ये न पूछो की हम क्या करेंगे
सर झुकाना अगर जुर्म होगा,
हम निगाहों से सजदा करेंगे
बात भी तेरी रखनी है साकी, ज़र्फ़ को भी न रुसवा करेंगे
जाम दे या न दे आज हमको,
मयकदे में सवेरा करेंगे
इस तरफ अपना जलेगा,
उस तरफ उनकी महफ़िल सजेगी हम अँधेरे को घर में बुलाकर,
उनके घर में उजाला करेंगे
बात तर्क-ए-तआल्लुक की अनवर,
इतना एहसास-ए-रस्मे-वफ़ा है
आखिरी सांस तक भी हम उनसे,
बेरुखी का न शिकवा करेंगे
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