Tuesday, June 9, 2026

राग:- सोरठ 

ग्वालिड़ा तू कोनी जाने पिड़ परायी

पिड़ परायी रे प्रीत परायी

बेठ कदम पर साँवरो बंसी बजायी जी

 सब गाय न घिर आयी

चोर चोर दही माखन खायो जी

 ब्रज की नार डराई

जनमत ही कुल त्यारण कहियो जी

 मात-पिता , गुरु भाई

राजा माधोसिंह जी रा कुवर प्रताप सिंघजी

सब मिल सोरठ गाई