राग:- सोरठ
ग्वालिड़ा तू कोनी जाने पिड़ परायी
पिड़ परायी रे प्रीत परायी
बेठ कदम पर साँवरो बंसी बजायी जी
सब गाय न घिर आयी
चोर चोर दही माखन खायो जी
ब्रज की नार डराई
जनमत ही कुल त्यारण कहियो जी
मात-पिता , गुरु भाई
राजा माधोसिंह जी रा कुवर प्रताप सिंघजी
सब मिल सोरठ गाई