Sunday, June 7, 2026

सुने री मैंने निरबल के बल राम ,

पिछली साख भरूँ संतन की 

अड़े सँवारे काम ।

जब लग गज बल अपनो बरत्यो, 

नेक सरयो नहीं काम ,

निर्बल ह्वै बल राम पुकार्‌यो,

आये आधे नाम ।

सुने री मैंने निरबल के बल राम ।

द्रुपद सुता निर्बल भईं ता दिन ,

तजि आये निज धाम ,

दुस्सासन की भुजा थकित भई, 

वसन रूप भये राम ।

सुने री मैंने निरबल के बल राम ।

अप बल,तप बल और बाहु बल ,

चौथा है बल राम ,

सूर किशोर कृपा से सब बल 

हारे को हरिनाम ।

सुने री मैंने निरबल के बल राम ।