अब कहूँ सुन सुन्न की शाखा
wergd hdsj kyfgdsdg अब कहूँ सुन सुन्न की शाखा सदा समान प्रमाण न जाका
अप्रमाण अलोकिक सो ही आद अंत जाका मद न कोई fdggfdgfdgfdfd हंसा ने जाय सुन्न घर जोया जेसे हीर हीर में हे पोया
जेसे पुष्प वासना दीसै नाही ऐसे भरिया ब्रह्म सब माह़ी
जेसे रवि और बिम्ब रहे भेला ऐसे हौया ब्रह्म संग मेला fgdgfdgfdgdfdf जड़ चेतन में हे इकसारा भरिया ब्रह्म न कुछ न्यारा
में नाही जग में चल आया उल्टा खेल अधर में पाया
हंसा ने जाय ब्रह्म गड़ जीता अनुभव वाणी अगम की कहता
बिना अनुभव कहें जो कोई आप मरै बिन मुक्ति न होई
जीवत मरै मुक्ति जो पा ले उनका वचन जुगा जुग चाले
बन्ना नाथ कहें अनुभव वाणी आ सोझी कोई विरला जाणी c bbvbvcbcfgfgfdgfddffgfgff | हरिॐनिरंज्जन राम |