Saturday, September 30, 2023

अब कहूँ सुन सुन्न की शाखा

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अब कहूँ सुन सुन्न की शाखा
सदा समान प्रमाण न जाका

अप्रमाण अलोकिक सो ही
आद अंत जाका मद न कोई

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हंसा ने जाय सुन्न घर जोया
 जेसे हीर हीर में हे पोया

जेसे पुष्प वासना दीसै नाही
ऐसे भरिया ब्रह्म सब माह़ी

जेसे रवि और बिम्ब रहे भेला
ऐसे हौया ब्रह्म संग मेला

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जड़ चेतन में हे इकसारा
भरिया ब्रह्म न कुछ न्यारा

में नाही जग में चल आया
उल्टा खेल अधर में पाया

हंसा ने जाय ब्रह्म गड़ जीता
अनुभव वाणी अगम की कहता


 बिना अनुभव कहें जो कोई
आप मरै बिन मुक्ति न होई

 जीवत मरै मुक्ति जो पा ले
 उनका वचन जुगा जुग चाले


बन्ना नाथ कहें अनुभव वाणी
     आ सोझी कोई विरला जाणी     
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         हरिॐनिरंज्जन राम